श्रीबटुकभैरवकवचम्
प्रस्तावना 4
विनियोग 1
कवच 10
फलश्रुति 7
समापन 2
परिचय
भैरवतन्त्र में वर्णित यह तन्त्रोक्त बटुकभैरवकवच बालरूप भैरव (बटुक) की उपासना का रक्षाकवच है। इसमें असिताङ्ग, रुरु, चण्ड, क्रोधन, उन्मत्त, कपाली, भीषण एवं संहार — इन अष्ट भैरवों को अलग-अलग दिशाओं में तथा शिव के पञ्चमुख एवं मातृकाओं के पुत्रों को शरीर, सन्तान, स्त्री, सेना, पशु व सम्पत्ति की रक्षा हेतु आवाहित किया गया है।
यहाँ संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः दिया गया है; अर्थ व्याख्यात्मक है। बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं। धार्मिक-विद्वत् समीक्षा अपेक्षित।
संदर्भ 2
- Sanskrit Documents — श्रीबटुकभैरवकवचम् — baTukabhairavakavacham, संशोधित ITRANS पाठ
संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; बीजमन्त्रों का शब्दशः अनुवाद सम्भव नहीं, अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
लाइसेंस: Verified against sanskritdocuments.org
- StotraNidhi — Sri Batuka Bhairava Kavacham (English) — दिशाओं के भैरवों का विवरण और व्याख्यात्मक अर्थ
यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।