श्रीवराहकवचम्
माहात्म्य 20
विनियोग 2
न्यास 5
ध्यानम् 1
कवच 16
फलश्रुति 15
समापन 1
परिचय
श्रीवराहकवचम् भगवान् विष्णु के वराह (आदिवराह) अवतार का रक्षा-कवच है, जो स्कन्दपुराण के श्रीमुष्ण-माहात्म्य में श्रीशिव द्वारा माता पार्वती को कहा गया है। श्वेतवराह भगवान् का ध्यान कर भक्त दिशाओं, कालों तथा अपने अंग-प्रत्यंग की रक्षा का वरण करता है; इसके ऋषि ब्रह्मा, छन्द अनुष्टुप् तथा देवता वराह हैं। यह पाठ शत्रु-बाधा, रोग, भय, विष एवं अभिचार से रक्षा तथा भुक्ति-मुक्ति देने वाला माना गया है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
संदर्भ 2
- Sanskrit Documents — श्रीवराहकवचम् — varAhakavacham (स्कन्द पुराण), संशोधित ITRANS पाठ
संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
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- Raja Thatha's Stotra Translations — Varaha Kavacham (P. R. Ramachander) — वराह कवचम् का श्लोकवार अंग्रेज़ी अनुवाद
यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।