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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीचण्डीकवचम्

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विनियोग 1

मार्कण्डेय उवाच 1

ब्रह्मोवाच 1

नवदुर्गा 3

रक्षामहिमा 3

मातृगण 7

स्तुति 1

दिग्बन्ध 4

कवच 22

फलश्रुति 14

समापन 1

परिचय

श्रीचण्डीकवचम् (देवीकवच) देवी दुर्गा-चण्डिका की आराधना का रक्षा-कवच है, जो मार्कण्डेयपुराण के देवीमाहात्म्य (दुर्गासप्तशती) का प्रथम अङ्ग माना जाता है। इसमें साधक नवदुर्गा के नामों का स्मरण कर, दसों दिशाओं में मातृकाओं का दिग्बन्ध कर, और शिखा से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की भिन्न-भिन्न देवियों द्वारा रक्षा का वरण करता है; अन्त में इसके नित्य पाठ का पुण्यफल कहा गया है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

संदर्भ 2

  • Sanskrit Documents — चण्डीकवचम् — chaNDiikavacham, संशोधित ITRANS पाठ

    संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।

    लाइसेंस: Verified against sanskritdocuments.org

  • Hindupedia — Devi Kavacham — अंग्रेज़ी श्लोकवार अर्थ (नवदुर्गा, दिग्बंध, अंग-प्रत्यंग की रक्षा, फलश्रुति)

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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