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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्री दुर्गा आरती - जय अम्बे गौरी

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परिचय

“जय अम्बे गौरी” माता दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरती है। यह आरती विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान और दुर्गा पूजा में गाई जाती है। इसमें माता दुर्गा के विभिन्न रूपों और उनकी असीम शक्ति का वर्णन किया गया है। अम्बे माता को गौरी (गौर वर्ण वाली) के रूप में संबोधित किया गया है।

आरती का महत्व

दुर्गा आरती का विशेष महत्व है क्योंकि माता दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है। इस आरती में माता के नौ रूपों और उनकी शक्तियों का वर्णन मिलता है। नवरात्रि में प्रतिदिन इस आरती को गाने से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

आरती करने की विधि

  1. माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं
  2. लाल फूल, चुनरी और सिंदूर अर्पित करें
  3. आरती गाते हुए थाली को माता के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं
  4. नवरात्रि में प्रतिदिन सांयकाल यह आरती करें
  5. प्रसाद के रूप में हलवा, पूरी और चने अर्पित करें

इस आरती के बारे में

मूल भाषा
हिन्दी
रचयिता
परंपरा से Shivanand Swami को श्रेय
सामान्यतः किस दिन
मंगलवार · शुक्रवारयह प्रचलित परंपरा है, कोई नियम नहीं।

साथ में पढ़ी जाने वाली

यह एक पारंपरिक पाठ है। लिप्यंतरण और अर्थ VedPath के लिए तैयार किए गए हैं। संपादकीय टिप्पणी

संदर्भ 1

  • Traditional Hindu Aarti — Named as the basis of this entry in its seed file

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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