श्रीचन्द्रकवचम्
विनियोग 1
ध्यानम् 1
कवच 5
फलश्रुति 1
समापन 1
परिचय
श्रीचन्द्रकवचम् भगवान् चन्द्र (सोम) की आराधना का रक्षा-कवच है, जिसके ऋषि गौतम, छन्द अनुष्टुप् और देवता श्रीचन्द्र हैं। इसमें साधक चन्द्र के विविध नामों — शशी, कलानिधि, चन्द्रमा, निशापति, क्षपाकर, कुमुदबान्धव, सोम, सुधाकर, मृगाङ्क आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में इसके पाठ-श्रवण का फल — भुक्ति, मुक्ति एवं सर्वत्र विजय — कहा गया है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
संदर्भ 2
- Sanskrit Documents — चन्द्रकवचम् — Chandrakavacham, Ravin Bhalekar / Kirk Wortman द्वारा एन्कोड व संशोधित
संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
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- Bhaktinidhi — Chandra Kavacham (English) — अंग्रेज़ी श्लोकवार अर्थ (विनियोग, ध्यान, अंग-रक्षा व फलश्रुति)
यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।