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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

ऋणमोचक मङ्गल स्तोत्रम्

पाठ स्थल उज्जैन
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स्कन्दपुराण में भारवि द्वारा कथित बारह श्लोकों का यह स्तोत्र मङ्गल (अङ्गारक) को समर्पित है। उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में मङ्गल दोष तथा ऋण-निवारण हेतु इसी का पाठ किया जाता है। मंगलवार को पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

संदर्भ 1

  • ऋणमोचकमङ्गलस्तोत्रम् (स्कान्दपुराणे भारविप्रोक्तम्) — 12 श्लोक

    Established by diffing three printings (lalitaalaalitah, bhaktibharat, pujavandana), none of which is clean. Readings adopted where they differ: महाकायः (not महाकयः), वृष्टेः (not व्रुष्टेः), कुजनामानि (not कूज-/कुजनामनि), विद्युत्कान्ति (not विघुत्कांति), स्वल्पाऽपि (feminine, agreeing with पीडा), मनस्तापाः (nom. pl., subject of नश्यन्तु), अतिवक्र दुराराध्य भोगमुक्त, विरिञ्चिशक्र, एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः, महतीं.

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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