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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

साई बाबा व्रत कथा

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शिरडी के श्री साई बाबा को समर्पित यह व्रत प्रत्येक गुरुवार को रखा जाता है और लगातार नौ गुरुवार तक किया जाता है। यह व्रत किसी पुराण या शास्त्र से नहीं, शिरडी के साई बाबा (महासमाधि 1918) की बीसवीं सदी की भक्ति-परम्परा से प्रचलित हुआ है। नीचे साई बाबा व्रत की पूजा विधि, उद्यापन एवं व्रत कथा दी गई है।

व्रत-दिन: प्रत्येक गुरुवार, लगातार नौ गुरुवार। व्रत किसी भी गुरुवार से साई बाबा का नाम लेकर आरम्भ किया जा सकता है; इसमें तिथि या मास का कोई नियम नहीं है।

साई बाबा व्रत का महत्व

साई बाबा व्रत को कोई भी व्यक्ति कर सकता है। इस व्रत के नियम भी अत्यंत सरल हैं। भक्तों का विश्वास है कि साई बाबा अपने भक्तों की इच्छाएँ पूरी करते हैं और उनके स्मरण मात्र से जीवन की बाधाएँ कम होती हैं। कहा जाता है कि शिरडी वाले श्री साई बाबा की महिमा का कोई ओर-छोर नहीं है।

साई बाबा नौ गुरुवार व्रत

साई बाबा व्रत को कोई भी साधारण जन कर सकता है। यहाँ तक कि बच्चे भी इस व्रत को कर सकते हैं। साई बाबा अपने भक्तों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करते। भक्तों का विश्वास है कि उनकी शरण में आने वाले अमीर-गरीब, किसी भी वर्ग के व्यक्ति के कार्य सिद्ध होते हैं। साई बाबा व्रत एक बार शुरू करने के बाद नियमित रूप से 9 गुरुवार तक किया जाता है। इस व्रत को कोई भी व्यक्ति किसी भी गुरुवार से साई बाबा का नाम लेकर शुरू कर सकता है।

व्रत करने के लिये प्रातः स्नान करने के बाद साई बाबा की फोटो की पूजा की जाती है। साई बाबा की फोटो लगाने के लिये सबसे पहले पीले रंग का वस्त्र बिछाया जाता है। इस पर साई बाबा की प्रतिमा या फोटो लगाई जाती है। इसे स्वच्छ पानी से पोंछ कर इसपर चंदन का तिलक लगाया जाता है।

साई बाबा की फोटो पर पीले फूलों का हार चढ़ाना चाहिए। अगरबत्ती और दीपक जलाकर साई व्रत की कथा पढ़नी चाहिए। और साई बाबा का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद बेसन के लड्डुओं का प्रसाद बांटा जाता है। इस व्रत को फलाहार ग्रहण करके किया जा सकता है। या फिर एक समय भोजन करके किया जा सकता है। इस व्रत में कुछ न कुछ खाना जरूरी है, भूखे रहकर इस व्रत को नहीं किया जाता है।

इस प्रकार व्रत करने के बाद 9 गुरुवार तक साई बाबा के मंदिर जाकर दर्शन करना भी शुभ रहता है। घर के निकट साई बाबा मंदिर न होने पर घर में भी साई फोटो की पूरी श्रद्धा से पूजा करनी चाहिए। किसी भी स्थान पर हों, व्रत की संख्या 9 होने से पूर्व इसे मध्य में नहीं छोड़ना चाहिए। प्रचलित परम्परा में, रजस्वला होने, बीमारी या यात्रा के कारण किसी गुरुवार को व्रत न हो सके तो उस गुरुवार को गिनती में नहीं लिया जाता; अगले गुरुवार से व्रत आगे बढ़ाया जाता है।

साई बाबा व्रत उद्यापन

शिरडी के साई बाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन और सामर्थ्य अनुसार दान देना चाहिए। इसके साथ ही साई बाबा की कृपा का प्रचार करने के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार साई व्रत की पुस्तकें अपने आस-पास के लोगों में बाँटी जाती हैं — प्रचलित परम्परा में 5, 11 या 21 पुस्तकें (इस पुस्तक में संख्या 7, 11 या 21 दी गई है)। इस प्रकार इस व्रत को समाप्त किया जाता है।

साई बाबा व्रत कथा

कथा-स्रोत: आधुनिक भक्ति-परम्परा (साई व्रत-पुस्तिकाओं में प्रचलित कथा)

एक शहर में कोकिला नाम की स्त्री और उसके पति महेशभाई रहते थे। दोनों का वैवाहिक जीवन सुखमय था। दोनों में आपस में स्नेह और प्रेम था। पर महेश भाई को कभी कभार झगड़ा करने की आदत थी। परन्तु कोकिला अपने पति के क्रोध का बुरा न मानती थी। वह धार्मिक आस्था और विश्वास वाली महिला थी। उसके पति का काम-धंधा भी बहुत अच्छा नहीं था। इस कारण वह अपना अधिकतर समय अपने घर पर ही व्यतीत करता था। समय के साथ काम में और कमी होने पर उसके स्वभाव में और अधिक चिड़चिड़ापन रहने लगा।

एक दिन दोपहर के समय कोकिला के दरवाजे पर एक वृद्ध महाराज आए। उनके चेहरे पर गजब का तेज था। वृद्ध महाराज के भिक्षा माँगने पर कोकिला ने उन्हें दाल-चावल दिए। और दोनों हाथों से उस वृद्ध बाबा को नमस्कार किया। बाबा के आशीर्वाद देने पर कोकिला के मन का दुःख उसकी आंखों से छलकने लगा। इस पर बाबा ने कोकिला को श्री साई व्रत के बारे में बताया और कहा कि इस व्रत को 9 गुरुवार तक एक समय भोजन करके करना है। पूर्ण विधि-विधान से पूजा करना और साईबाबा पर अटूट श्रद्धा रखना। तुम्हारी मनोकामना जरूर पूरी होगी।

महाराज के बताए अनुसार कोकिला ने नौ गुरुवार तक साई बाबा का व्रत किया। और 9वें गुरुवार को गरीबों को भोजन भी दिया। साथ ही साई पुस्तकें भेंट स्वरुप दी। ऐसा करने से उसके घर के झगड़े दूर हो गये और उसके घर की सुख शान्ति में वृद्धि हुई। इसके बाद दोनों का जीवन सुखमय हो गया।

एक बार उसकी जेठानी ने बातों-बातों में उसे बताया कि उसके बच्चे पढ़ाई नहीं करते यही कारण है कि परीक्षा में वे फेल हो जाते हैं। कोकिला बहन ने अपनी जेठानी को श्री साई बाबा के 9 व्रत का महत्व बताया। कोकिला बहन के बताये अनुसार जेठानी ने साई व्रत का पालन किया। उसके थोड़े ही दिनों में उसके बच्चे पढ़ाई करने लगे। और बहुत अच्छे अंकों से पास हुए।

स्रोत 1

  • Vrat Katha (Archive.org - VratKathaBook) — साई बाबा व्रत पूजा एवं कथा, पृष्ठ 275–277

    पूजा विधि, उद्यापन और कथा पुस्तक के स्कैन किए गए पृष्ठ-चित्रों से उतारे गए और मानक हिंदी वर्तनी में सम्पादित किए गए। अक्टूबर 2026 की संपादकीय समीक्षा में पुस्तक का "चमत्कार" निबंध (असत्यापित आँकड़े सहित) हटाया गया, फल-संबंधी कथन भक्तों के विश्वास के रूप में रखे गए और व्याकरण सुधारा गया; व्रत-दिन और व्रत छूटने का नियम वेद पथ द्वारा जोड़े गए हैं।

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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