जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी
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मांडणी
जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी, शुम्भ विदारिणी मात भवानी ।
आदिशक्ति परब्रह्म स्वरूपिणी, जग जननी चहुँ वेद बखानी ।
ब्रह्मा शिव हरि अर्चन कीनो, ध्यान धरत सुर नर मुनि ज्ञानी ।
अष्टभुजा कर खड्ग विराजे, सिंह सवार सकल वरदानी ।
ब्रह्मानन्द शरण में आयो, भव भय नाश करो महारानी ।
जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी, शुम्भ विदारिणी मात भवानी ।
आदिशक्ति परब्रह्म स्वरूपिणी, जग जननी चहुँ वेद बखानी ।
ब्रह्मा शिव हरि अर्चन कीनो, ध्यान धरत सुर नर मुनि ज्ञानी ।
अष्टभुजा कर खड्ग विराजे, सिंह सवार सकल वरदानी ।
ब्रह्मानन्द शरण में आयो, भव भय नाश करो महारानी ।
स्रोत 1
- Sahaja Yoga "Sahaj Geet" pustika — Traditional deity bhajans only
संदर्भ 3
- archive.org — Shri Brahmanand Bhajanmala, Nirnay Sagar Press 1919, bhajan (१०): full text, tek + 4 numbered antaras; 'ब्रह्मा शिव हरि अर्चन कीनो', 'भवभय नाश करो महारानी'
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- archive.org — Shri Brahmanand Bhajan Mala, Brahmanand Ashram Pushkar 1945: same text (जगजननी, अर्चन कीनो, नाश करो)
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- archive.org — Shri Brahmanand Bhajan Mala, Ajmer 1966: third witness, same text
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