श्रीशनैश्चरवज्रपञ्जरकवचम्
विनियोग 1
न्यास 1
ध्यानम् 1
प्रस्तावना 2
कवच 5
फलश्रुति 4
समापन 1
परिचय
श्रीशनैश्चरवज्रपञ्जरकवचम् नवग्रहों में शनि (शनैश्चर) की उपासना का रक्षा-कवच है, जो ब्रह्माण्डपुराण में ब्रह्मा एवं नारद के संवाद के रूप में प्राप्त होता है। ‘वज्रपञ्जर’ अर्थात् वज्र का पिंजरा — एक अभेद्य रक्षा-कवच। इसमें साधक शनि के विविध नामों — सूर्यनन्दन, छायात्मज, यमानुज, भास्कर, मन्दगति, पिप्पल आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में जन्मकुण्डली के व्यय, जन्म, अष्टम आदि भावों में स्थित शनि-दोष के शमन का फल कहा गया है।
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।
संदर्भ 2
- Sanskrit Documents — शनिवज्रकवच — Shanivajrakavacha (शनि वज्रपंजर कवचम्), संशोधित
संस्कृत मूल पाठ इसी प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
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- OnlineJyotish — Shani Vajra Panjara Kavacham — अंग्रेज़ी श्लोकवार अर्थ (अंग-रक्षा व फलश्रुति)
यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।