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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीशुक्रकवचम्

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प्रदर्शन

मङ्गलाचरण 1

विनियोग 1

ध्यानम् 1

कवच 5

फलश्रुति 1

समापन 1

परिचय

श्रीशुक्रकवचम् नवग्रहों में शुक्र (शुक्राचार्य) का रक्षा-कवच है, जो ब्रह्माण्डपुराण में प्राप्त होता है और भारद्वाज ऋषि से सम्बद्ध माना जाता है। इसमें साधक शुक्र के विविध नामों — भार्गव, ग्रहाधिप, दैत्यगुरु, काव्य, उशना, भृगुसुत आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में श्रद्धापूर्वक पाठ का फल कहा गया है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

संदर्भ 2

  • Sanskrit Documents — शुक्रकवचम् — Shukrakavacham, Ravin Bhalekar द्वारा एन्कोड व संशोधित

    संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।

    लाइसेंस: Verified against sanskritdocuments.org

  • Hindupedia — Shukra Kavacham — अंग्रेज़ी श्लोकवार अर्थ (ध्यान, अंग-रक्षा व फलश्रुति)

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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