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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्रीमहालक्ष्मीकवचम्

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प्रदर्शन

विनियोग 1

प्रस्तावना 2

कवच 6

फलश्रुति 4

समापन 1

परिचय

श्रीमहालक्ष्मीकवचम् धन, ऐश्वर्य एवं मंगल की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का रक्षा-कवच है, जो ब्रह्मपुराण में इन्द्र को उपदिष्ट माना जाता है। इन्द्र के प्रश्न पर बृहस्पति (श्रीगुरु) स्वयं ब्रह्मा द्वारा कहे गए इस गोपनीय कवच को कहते हैं, जिसमें साधक देवी के विविध नामों — विष्णुपत्नी, अमृतोद्भवा, महालक्ष्मी, वैष्णवी, नारायणी, इन्दिरा आदि — का स्मरण कर शिर से चरण तक अपने प्रत्येक अंग की रक्षा का वरण करता है, और अन्त में इसके पाठ का फल कहा गया है।

संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः प्रस्तुत है; अर्थ व्याख्यात्मक हैं। शुद्ध उच्चारण एवं विधि हेतु योग्य आचार्य का मार्गदर्शन श्रेयस्कर है।

संदर्भ 2

  • Sanskrit Documents — महालक्ष्मीकवचम् — Indra-krita Mahalakshmi Kavacha, संशोधित ITRANS पाठ

    संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।

    लाइसेंस: Verified against sanskritdocuments.org

  • GuruKripa — Mahalakshmi Kavacham — अंग्रेज़ी श्लोकवार अर्थ (अंग-रक्षा व फलश्रुति)

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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