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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

बजरंग बाण

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परिचय

बजरंग बाण भगवान हनुमान की एक अत्यन्त प्रभावशाली स्तुति एवं ‘पाठ’ है, जो पारम्परिक रूप से गोस्वामी तुलसीदास से सम्बद्ध मानी जाती है। इसमें हनुमान जी के पराक्रमों का स्मरण करते हुए बीज-मन्त्रों (ॐ हनु, ॐ ह्रीं, ॐ चं, ॐ हं-सं आदि) के साथ भक्त उनसे शत्रु, भय, रोग और भूत-प्रेत बाधा के तत्काल निवारण की प्रार्थना करता है। ‘बाण’ शब्द इसकी तीव्र एवं अमोघ शक्ति का सूचक है।

महत्व

भक्तों का विश्वास है कि श्रद्धा और नियम के साथ बजरंग बाण का पाठ संकट, भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है। इसे प्रायः हनुमान चालीसा एवं संकटमोचन हनुमानाष्टक के साथ मंगलवार तथा शनिवार को पढ़ा जाता है।

पाठ विधि

स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठें, हनुमान जी के समक्ष दीप-धूप प्रज्वलित करें और शुद्ध उच्चारण एवं दृढ़ श्रद्धा के साथ आरम्भिक दोहे से पाठ प्रारम्भ कर अन्तिम दोहे पर समापन करें। बीज-मन्त्रों का उच्चारण सावधानी और श्रद्धापूर्वक करना चाहिए।

संदर्भ 2

  • श्री बजरंग बाण पाठ - BhaktiBharat.com — निश्चय प्रेम प्रतीति ते — पारम्परिक हनुमान बजरंग बाण

    पाठ-रूप (यथा 'जै गिरिधर जै जै सुख सागर', श-रूप 'कपीशा/शीशा/शपथ/निशाचर', 'अग्नि बेताल', समापन दोहा 'प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै') इस स्रोत पृष्ठ से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलान कर लिया गया है। यह बजरंग बाण पारम्परिक रूप से गोस्वामी तुलसीदास कृत माना जाता है।

  • Sanskrit Documents - श्रीबजरंगबाण (गोस्वामी तुलसीदास) — श्रीबजरंगबाण — प्रूफ़रीड प्रामाणिक देवनागरी पाठ

    सम्पूर्ण पंक्ति-क्रम एवं चौपाई-सूची (३४ चौपाई) को इस प्रूफ़रीड प्रामाणिक पाठ से अंतिम रूप से मिलाया गया है। बजरंग बाण के मुद्रित संस्करणों में पुरानी-नई हिन्दी एवं चौपाई-क्रम के कारण स्वाभाविक पाठभेद मिलते हैं; ऊपर के पाठ-रूप उपयोगकर्ता के उद्धृत स्रोत (BhaktiBharat) के अनुसार रखे गए हैं।

    लाइसेंस: Verified against sanskritdocuments.org

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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