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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

रुद्राष्टकम्

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परिचय

रुद्राष्टकम् भगवान शिव की आठ श्लोकों वाली प्रसिद्ध स्तुति है। परंपरा में इसे गोस्वामी तुलसीदास जी से सम्बद्ध माना जाता है और रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड से जोड़ा जाता है।

यह स्तोत्र शिव के निराकार, निर्गुण, कल्याणकारी और कृपालु स्वरूप का ध्यान कराता है। इसके पाठ में भक्त भगवान शम्भु से कृपा, शांति और संसार-दुःख से रक्षा की प्रार्थना करता है।

पाठ विधि

  • सोमवार, प्रदोष, श्रावण मास और महाशिवरात्रि पर इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
  • पाठ से पहले शिवलिंग या शिव के स्वरूप का ध्यान करें।
  • शुद्ध उच्चारण के साथ शांत भाव से पाठ करें।

संदर्भ 2

  • Rudrashtakam — रामचरितमानस, उत्तरकाण्ड

    प्रचलित रुद्राष्टकम् और रामचरितमानस से उसके संबंध का डिजिटल पाठ; धार्मिक समीक्षा में रामचरितमानस के मुद्रित संस्करण से मिलान करें।

  • Rudrashtakam — सार्वजनिक परिचय और श्रेय-संदर्भ

    केवल श्रेय-संदर्भ के रूप में प्रयुक्त, अंतिम पाठ-प्रमाण के रूप में नहीं।

    लाइसेंस: CC BY-SA 4.0 — Text adapted from Wikimedia projects, licensed CC BY-SA 4.0. Adaptations must be shared alike.

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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