शेंदुर लाल चढायो
आकार
मांडणी
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को ।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहर को ।
हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवर को ।
महिमा कहे न जाय लागत हूं पद को ।
जय देव जय देव ॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ।
जय देव जय देव ॥
भावभगत से कोई शरणागत आवे ।
संतति संपति सबहि भरपूर पावे ।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।
गोसावीनन्दन निशिदिन गुण गावे ।
जय देव जय देव ॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ।
जय देव जय देव ॥
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को ।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहर को ।
हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवर को ।
महिमा कहे न जाय लागत हूं पद को ।
जय देव जय देव ॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ।
जय देव जय देव ॥
भावभगत से कोई शरणागत आवे ।
संतति संपति सबहि भरपूर पावे ।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।
गोसावीनन्दन निशिदिन गुण गावे ।
जय देव जय देव ॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता ।
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता ।
जय देव जय देव ॥
स्रोत 1
- Traditional aarti — Sung text in common household use
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