श्रीगोपालकवचम्
मङ्गलाचरण 1
प्रस्तावना 2
विनियोग 1
कवच 10
फलश्रुति 4
समापन 1
परिचय
नारदपञ्चरात्र (ज्ञानामृतसार) में वर्णित यह श्रीगोपालकवच भगवान् महादेव द्वारा देवी को उपदिष्ट है। इसमें बालकृष्ण (गोपाल) के विविध नाम-रूपों का आवाहन कर सिर से पाँव तक प्रत्येक अङ्ग तथा दसों दिशाओं में रक्षा की प्रार्थना की गई है। अन्त में इसका नित्य पाठ करने वाले को विपत्ति व शत्रुओं से मुक्ति एवं गोपाल-चरण की प्राप्ति का फल कहा गया है।
यहाँ संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः दिया गया है; अर्थ व्याख्यात्मक है। धार्मिक-विद्वत् समीक्षा अपेक्षित।
संदर्भ 2
- Sanskrit Documents — श्रीगोपालकवचम् — gopAlakavacham, PSA Easwaran द्वारा संशोधित
संस्कृत मूल पाठ प्रामाणिक स्रोत से अक्षरशः; अर्थ व्याख्यात्मक। धार्मिक समीक्षा अपेक्षित।
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- Hindupedia — Gopala Kavacham (English) — अंगों और दिशाओं की रक्षा का विवरण, व्याख्यात्मक अर्थ
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