ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र
आकार
प्रदर्शन
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
शब्दार्थ
ॐ परम पवित्र ध्वनि, ब्रह्म का प्रतीक
नमो नमन, प्रणाम
भगवते भगवान को, ऐश्वर्यवान को
वासुदेवाय वासुदेव (वसुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण) को
अर्थ
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” वैष्णव संप्रदाय का सबसे प्रमुख मंत्र है। इसे द्वादशाक्षरी मंत्र (बारह अक्षरों का मंत्र) कहा जाता है। यह विष्णु पुराण में प्रह्लाद द्वारा उच्चारित किया गया था। वासुदेव का अर्थ है “वसुदेव के पुत्र” अर्थात श्रीकृष्ण, और साथ ही “सर्वव्यापी परमात्मा”।
संपूर्ण अर्थ: “मैं भगवान वासुदेव (श्रीकृष्ण/विष्णु) को नमन करता हूँ, जो समस्त ऐश्वर्यों से संपन्न हैं।“
लाभ
- मोक्ष प्राप्ति: यह मंत्र मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है
- विष्णु कृपा: भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- भक्ति वृद्धि: हृदय में भक्ति भाव जागृत होता है
- पाप नाश: समस्त पापों और कर्मबंधनों का नाश होता है
- मानसिक शांति: मन को शांति और संतोष प्राप्त होता है
- सुरक्षा: विपत्तियों और भय से रक्षा होती है
जप विधि
- प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल जप करें
- तुलसी की माला से जप करना विशेष लाभकारी है
- 108 बार या इसके गुणक में जप करें
- एकादशी और गुरुवार को जप विशेष फलदायी है
- जन्माष्टमी पर इस मंत्र का विशेष महत्व है
- जप करते समय भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का ध्यान करें
जप गणक
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संदर्भ 2
- Vishnu Purana (1.19.65) — Named as the basis of this entry in its seed file
- Bhagavata Purana — Named as the basis of this entry in its seed file
यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।