ॐ नमः शिवाय मंत्र
शब्दार्थ
अर्थ
“ॐ नमः शिवाय” शैव संप्रदाय का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण मंत्र है। इसे पंचाक्षरी मंत्र (पाँच अक्षरों का मंत्र - न, मः, शि, वा, य) कहा जाता है। यह यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में पाया जाता है।
संपूर्ण अर्थ: “मैं शिव को नमन करता हूँ” - यहाँ शिव का अर्थ है “कल्याणकारी” या “मंगलकारी”। यह मंत्र भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।
लाभ
- आत्मशुद्धि: मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है
- शिव कृपा: भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- पाप नाश: समस्त पापों का नाश होता है
- मोक्ष प्राप्ति: जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
- मानसिक शांति: चित्त को शांति और स्थिरता मिलती है
- नकारात्मकता का नाश: नकारात्मक विचारों और ऊर्जाओं से मुक्ति
जप विधि
- यह मंत्र किसी भी समय, किसी भी स्थान पर जपा जा सकता है
- रुद्राक्ष माला से जप करना विशेष लाभकारी है
- 108 बार या इसके गुणक में जप करें
- सोमवार और महाशिवरात्रि पर जप विशेष फलदायी है
- श्रावण मास में नियमित जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है
- जप करते समय भगवान शिव के स्वरूप का ध्यान करें
जप गणक
पूर्ण 🙏
संदर्भ 1
- Shri Rudram — तैत्तिरीय संहिता 4.5.8, नमकम्
श्री रुद्रम् परंपरा में इस मंत्र के स्थान का सार्वजनिक संदर्भ; धार्मिक समीक्षा में शाखा-भेद सहित सटीक पाठ का किसी वैदिक संस्करण से मिलान करें।
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यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।