श्री गणेश आरती - जय गणेश जय गणेश देवा
शब्दार्थ
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परिचय
“जय गणेश जय गणेश देवा” भगवान श्री गणेश की सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से गाई जाने वाली आरती है। यह आरती प्रत्येक हिन्दू घर में पूजा-अर्चना के समय गाई जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी आरती की जाती है।
आरती का महत्व
गणेश आरती का विशेष महत्व है क्योंकि भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूज्य माना जाता है। इस आरती में उनके स्वरूप, गुणों और महिमा का वर्णन किया गया है। माता पार्वती और पिता महादेव के पुत्र के रूप में उनकी स्तुति की गई है। यह आरती भक्तों को विघ्नों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करती है।
आरती करने की विधि
- गणेश जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक या घी का दीया जलाएं
- आरती की थाली में दीपक, फूल, अक्षत और धूप रखें
- आरती गाते हुए थाली को भगवान गणेश के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं
- आरती के बाद सभी भक्तजन हाथ जोड़कर प्रणाम करें
- प्रसाद के रूप में मोदक या लड्डू अर्पित करें
संदर्भ 1
- Traditional Hindu Aarti — Named as the basis of this entry in its seed file
यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।