लल्ला की पैंजनिया बाजे रे
आकार
प्रदर्शन
लल्ला की पैंजनिया बाजे रे, प्यारे की पैंजनिया बाजे रे ।
झूम झूम झूम झूम छननन ॥
जसुमति सुत कौ नचन सिखावत, अंगुरी पकर बिचकनिया ॥
अंग अंग राजत आभूषण, कटि सोहै करधनिया ॥
पीत झंगुलिया कटि पै सोहै, सिर टोपी लटकनिया ॥
तीन लोक जाके उदर बसत हैं, ताहि नचावै नंदरनिया ॥
लल्ला की पैंजनिया बाजे रे, प्यारे की पैंजनिया बाजे रे ।
झूम झूम झूम झूम छननन ॥
जसुमति सुत कौ नचन सिखावत, अंगुरी पकर बिचकनिया ॥
अंग अंग राजत आभूषण, कटि सोहै करधनिया ॥
पीत झंगुलिया कटि पै सोहै, सिर टोपी लटकनिया ॥
तीन लोक जाके उदर बसत हैं, ताहि नचावै नंदरनिया ॥
स्रोत 1
- Sahaja Yoga "Sahaj Geet" pustika — Traditional deity bhajans only
संदर्भ 3
- archive.org — Radhavallabh Chaturvedi, 'Unchi Atariya Rang Bhari' (Braj lokgeet sangrah), p. 278, 'रसिया (बाल लीला)': refrain + 4 antaras with notation — primary text
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- archive.org — Second scan of the same book: confirms the refrain 'छूम छूम छन नन छन नन ननन, प्यारे की पैजनिया बाजै रे। लाला की पैजनिया बाजै रे' and antaras 2–4
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- archive.org — 'Chand Sakhi ke Bhajan' no. 24, 'बाजे-बाजे रे लाल! तेरी पैजनियाँ': a related but different pad (has 'जसुमति सुत को चलन सिखावे'); used only for comparison, not as text
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यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।