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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

जय शंकर भोले जय शिव शंकर

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स्रोत 1

  • Sahaja Yoga "Sahaj Geet" pustika — Traditional deity bhajans only

संदर्भ 3

  • archive.org — Gita Press Bhajan Sudha, no. (५२): '[जय शिव शंकर-२] जय शंकर भोले / सब देवों में देव निराले जय बम-बम भोले॥ टेर॥ / महादेव तू ने ही तो सब देवों का सन्ताप हरा / सागर-मन्थन में निकला विष तू ने अपने कण्ठ धरा / इसीलिए हर प्राणी तुझको नील कण्ठ बोले / तेरे नाम अनेकों बाबा तेरी महिमा न्यारी / तेरे भेद अनोखे सबसे क्या जाने संसारी / तू ही है कैलाशपति तू पर्वत पर डोले / शीश तुम्हारे गंगा मैया चन्द्र शिखर में सोहे / तन पे सर्प विचरते रहते, भक्तों के मन मोहे / उसको कैसा कष्ट जगत में नाम तेरा जो ले' — same 3 antaras, confirms the text is complete.

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  • archive.org — 'Prabhu Sumiran' bhajan book, same text ('...तूने अपने कंठ भरा', 'चन्द्र शिखर पे सोहे', 'तेरे भेद अनोखे सबसे क्या जाने संसारी', 'तू ही है कैलाशपति तू पर्वत पर डोले', 'उसको कैसे कष्ट जगत में नाम तेरा जो ले'), credited 'गायक: अनूप जलोटा'.

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  • archive.org — Anup Jalota Bhajan Sangrah: refrain 'सब देवों में देव निराले जय बम बम भोले', 'महादेव तुमने ही तो...', 'तू ही है कैलाशपति तू पर्वत पर डोले', 'चन्द्र शिखर पे ...', 'उसको कैसा कष्ट जगत में नाम तेरा जो ले'.

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यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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