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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

महामृत्युंजय मंत्र

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अर्थ

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। इसे “मृत्यु को जीतने वाला मंत्र” भी कहा जाता है। यह ऋग्वेद के सातवें मंडल में ऋषि वसिष्ठ द्वारा रचित है।

संपूर्ण अर्थ: “हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ ककड़ी अपनी लता के बंधन से स्वतः मुक्त हो जाती है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरता से नहीं।“

लाभ

  • रोग निवारण: गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए इस मंत्र का जप किया जाता है
  • दीर्घायु: यह मंत्र दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करता है
  • भय निवारण: मृत्यु और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति
  • आध्यात्मिक शक्ति: आंतरिक शक्ति और साहस का विकास
  • नकारात्मकता से रक्षा: नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों से सुरक्षा

जप विधि

  1. सोमवार को या महाशिवरात्रि पर जप करना विशेष फलदायी है
  2. रुद्राक्ष माला से जप करें
  3. न्यूनतम 108 बार (एक माला) जप करें
  4. जप करते समय भगवान शिव का ध्यान करें
  5. प्रातःकाल या सांध्यकाल में जप करना उत्तम है

जप गणक

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पूर्ण 🙏

संदर्भ 1

  • Mahamrityunjaya Mantra — ऋग्वेद 7.59.12; यजुर्वेद की शाखाओं में भी प्राप्त

    वैदिक मंत्र के स्थान का सार्वजनिक संदर्भ; धार्मिक समीक्षा में स्वर और शाखा-भेद का किसी वैदिक संस्करण से मिलान करें।

    लाइसेंस: CC BY-SA 4.0 — Text adapted from Wikimedia projects, licensed CC BY-SA 4.0. Adaptations must be shared alike.

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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