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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्री रुद्रं नमकम्

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प्रथमोऽनुवाकः
द्वितीयोऽनुवाकः
तृतीयोऽनुवाकः
चतुर्थोऽनुवाकः
पञ्चमोऽनुवाकः
षष्ठोऽनुवाकः
सप्तमोऽनुवाकः
अष्टमोऽनुवाकः
नवमोऽनुवाकः
दशमोऽनुवाकः
एकादशोऽनुवाकः
समापन-मन्त्राः

परिचय

श्री रुद्रं नमकम् कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (चतुर्थ काण्ड, पंचम प्रपाठक) का रुद्रप्रश्न है। इसे नमकम् इसलिए कहते हैं क्योंकि इसका प्रत्येक चरण ‘नमः’ शब्द से युक्त है। इसी के आठवें अनुवाक में ‘नमः शिवाय च शिवतराय च’ पद आता है — पंचाक्षर महामन्त्र का वैदिक स्रोत।

प्रथम अनुवाक रुद्र के क्रोध की शान्ति की प्रार्थना है — उनसे धनुष की प्रत्यंचा उतारने और बाणों को दूर रखने की विनती।

द्वितीय से नवम अनुवाक नमस्कारों की सुदीर्घ मालाएँ हैं, जिनमें रुद्र को समस्त रूपों में पहचाना गया है — वृक्ष और पर्वत, सेनापति और वणिक्, चोर और तस्कर, बढ़ई और कुम्हार, श्वान और श्वानपति तक। यही इस सूक्त की विशेषता है: रुद्र किसी एक वर्ग के देवता नहीं, अपितु सर्वत्र व्याप्त हैं।

दशम और एकादश अनुवाक पुनः छन्दोबद्ध श्लोकों में लौटते हैं और सन्तान, गौ, अश्व तथा ग्रामजनों की रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

अन्त में महामृत्युंजय मन्त्र ‘त्र्यम्बकं यजामहे’ का पाठ होता है।

पाठ विधि

  • पाठ से पूर्व लघुन्यासम् करें, और नमकम् के पश्चात् चमकम् का पाठ करें।
  • परम्परा के अनुसार एक चमकम् के साथ ग्यारह बार नमकम् का पाठ ‘एकादश रुद्र’ कहलाता है; इसकी ग्यारह आवृत्ति ‘लघु रुद्र’ तथा उसकी ग्यारह आवृत्ति ‘महा रुद्र’ कहलाती है।
  • रुद्राभिषेक में प्रत्येक अनुवाक के साथ शिवलिंग पर जल, दुग्ध या पंचामृत की धारा अर्पित की जाती है।
  • स्वर-चिह्न वैदिक उच्चारण के लिए अंकित हैं; शुद्ध स्वर के साथ पाठ करना आवश्यक माना गया है।
  • सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास में इसका पाठ विशेष फलदायी है।

संदर्भ 2

  • Sri Rudram (vignanam.org, Vaidika Vignanam) — सरल देवनागरी संस्करण — सरलीकृत अनुस्वार, स्वर-चिह्नों सहित

    The Devanagari reproduced here follows this edition akshara-for-akshara, including its simplified anusvara spellings (पंच, संकाशं, कंठे) and its Vedic nasal-glide notation (रुद्रं-वैँ, शिखायां-वाँमदेवाः), which match the convention used elsewhere on this site. Thirteen readings were corrected against sanskritdocuments.org where this edition had dropped or swapped a consonant: वाघृदये → वाग्धृदये, मूर्द्नि → मूर्ध्नि, जठरेऽअग्नि → जठरेऽग्नि, प्रयच्चंतु → प्रयच्छंतु, अभिषिंचेच्चिवम् → अभिषिंचेच्छिवम्, मीडुष्टम → मीढुष्टम, विद्यद्भ्यश्च → विध्यद्भ्यश्च, आक्खिदते → आख्खिदते, प्रक्खिदते → प्रख्खिदते, सत्वानो → सत्त्वानो, जैष्ठ्यं → ज्यैष्ठ्यं, त्वष्ठा → त्वष्टा, श्यामाकाश्च → श्यामकाश्च.

  • rudraprashnaH kR^iShNayajurvedIya sasvaraH (sanskritdocuments.org) — doc_veda/rudra.html — लघुन्यासः और नमकम्, स्वर-चिह्नों सहित

    Independent accented witness, used for a word-by-word verification pass. It writes the shuddha-devanagari conjuncts (सङ्काश, पञ्च) and uses ꣳ where this edition writes ग्ं — notational differences, not textual ones. Its laghunyasa omits the अथातो रुद्र स्नानार्चनाभिषेक विधिं prose passage and adds सर्वान् महाजनान् रक्षन्तु after माग्ं रक्षन्तु; both are edition differences in the preliminary matter, and this page follows the vignanam recension throughout.

    लाइसेंस: Verified against sanskritdocuments.org

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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