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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

श्री रुद्रं लघुन्यासम्

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प्रदर्शन
ध्यानम्
स्नानार्चन-विधिः
आत्मनि देवता-स्थापनम्
अङ्ग-श्रयण-मन्त्राः
विनियोगः
कर-न्यासः
अङ्ग-न्यासः
ध्यानम्
गणपति-प्रार्थना
शान्ति-प्रार्थना

परिचय

श्री रुद्रं लघुन्यासम् वह पूर्वांग है जो नमकम् के पाठ से पहले किया जाता है। इसमें रुद्र का ध्यान, शरीर के अंगों में देवताओं की स्थापना (न्यास), विनियोग, कर-न्यास तथा अंग-न्यास सम्मिलित हैं।

आरम्भ के ध्यान-श्लोक रुद्र का वर्णन शुद्ध स्फटिक के समान कान्तिमान्, त्रिनेत्र, पंचमुख, गंगाधर, दशभुज और व्याघ्रचर्मधारी के रूप में करते हैं। इसके पश्चात् साधक अपने प्रत्येक अंग में एक-एक देवता की स्थापना करता है — जननेन्द्रिय में ब्रह्मा, चरणों में विष्णु, हृदय में शिव, शिर में महादेव।

‘अग्निर्मे वाचि श्रितः’ से आरम्भ होने वाला भाग एक श्रृंखला है जिसमें प्रत्येक देवता इन्द्रिय में, इन्द्रिय हृदय में, हृदय साधक में, साधक अमृत में और अमृत ब्रह्म में प्रतिष्ठित बताया गया है — यही इस न्यास का तात्त्विक सार है।

अन्त में महागणपति की प्रार्थना तथा ‘शं च मे मयश्च मे’ की शान्ति-प्रार्थना है, जो चमकम् के तृतीय अनुवाक से ली गई है।

पाठ विधि

  • लघुन्यासम् का पाठ सदैव नमकम् से पूर्व किया जाता है; नमकम् के पश्चात् चमकम् का पाठ होता है।
  • स्नान करके, शुद्ध श्वेत वस्त्र धारण कर, देव की ओर मुख करके बैठें।
  • न्यास के समय जिस अंग का नाम आए, उसे दाहिने हाथ से स्पर्श करें।
  • स्वर-चिह्न (उदात्त, अनुदात्त, स्वरित) वैदिक उच्चारण के लिए अंकित हैं; सम्भव हो तो गुरुमुख से स्वर सीखकर ही पाठ करें।
  • सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास में इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

संदर्भ 2

  • Sri Rudram (vignanam.org, Vaidika Vignanam) — सरल देवनागरी संस्करण — सरलीकृत अनुस्वार, स्वर-चिह्नों सहित

    The Devanagari reproduced here follows this edition akshara-for-akshara, including its simplified anusvara spellings (पंच, संकाशं, कंठे) and its Vedic nasal-glide notation (रुद्रं-वैँ, शिखायां-वाँमदेवाः), which match the convention used elsewhere on this site. Thirteen readings were corrected against sanskritdocuments.org where this edition had dropped or swapped a consonant: वाघृदये → वाग्धृदये, मूर्द्नि → मूर्ध्नि, जठरेऽअग्नि → जठरेऽग्नि, प्रयच्चंतु → प्रयच्छंतु, अभिषिंचेच्चिवम् → अभिषिंचेच्छिवम्, मीडुष्टम → मीढुष्टम, विद्यद्भ्यश्च → विध्यद्भ्यश्च, आक्खिदते → आख्खिदते, प्रक्खिदते → प्रख्खिदते, सत्वानो → सत्त्वानो, जैष्ठ्यं → ज्यैष्ठ्यं, त्वष्ठा → त्वष्टा, श्यामाकाश्च → श्यामकाश्च.

  • rudraprashnaH kR^iShNayajurvedIya sasvaraH (sanskritdocuments.org) — doc_veda/rudra.html — लघुन्यासः और नमकम्, स्वर-चिह्नों सहित

    Independent accented witness, used for a word-by-word verification pass. It writes the shuddha-devanagari conjuncts (सङ्काश, पञ्च) and uses ꣳ where this edition writes ग्ं — notational differences, not textual ones. Its laghunyasa omits the अथातो रुद्र स्नानार्चनाभिषेक विधिं prose passage and adds सर्वान् महाजनान् रक्षन्तु after माग्ं रक्षन्तु; both are edition differences in the preliminary matter, and this page follows the vignanam recension throughout.

    लाइसेंस: Verified against sanskritdocuments.org

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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