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वेद पथ वैदिक ज्ञान का पथ

बुधवार प्रदोष व्रत कथा

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तिथि: बुधवार को पड़ने वाली त्रयोदशी (शुक्ल या कृष्ण पक्ष)। व्रत उस दिन होता है जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का संध्या-समय) में त्रयोदशी हो, और वह दिन जिस वार को पड़े उसी वार का प्रदोष माना जाता है। अनेक आधुनिक पंचांग बुधवार के प्रदोष को “सौम्य प्रदोष” (सौम्य = बुध) भी कहते हैं। दिनांक स्थान के अनुसार बदल सकता है।

सूतजी बोले कि हे ऋषियो! सुनो, मान्यता है कि बुधवार प्रदोष व्रत सभी प्रकार की कामनाओं को पूर्ण करनेवाला है।

व्रत विधि

इस व्रत में हरी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। भगवान शिव का पूजन बिल्वपत्र, धूपादि से करना चाहिए और भोजन एक बार ही करना चाहिए। अब आप लोग यह कथा श्रवण करें—

कथा

कथा-स्रोत: लोक-परम्परा (उत्तर भारत की व्रत-पुस्तिकाओं में प्रचलित कथा; किसी पुराण में इसका स्थान चिह्नित नहीं है)

यह कथा अति प्राचीन है। एक युवक का नया-नया विवाह हुआ था। विवाह के दो दिन बाद ही उसकी नवविवाहिता पत्नी अपने पीहर चली गई। युवक से उसका बिछोह सहन नहीं हुआ तो कुछ दिनों बाद ही वह अपनी पत्नी को लिवा लाने के लिए अपनी ससुराल जा पहुँचा। बुधवार के दिन वह अपनी पत्नी को विदा कराने की जिद कर बैठा। ससुरालवालों ने काफी समझाया कि बुधवार को बेटी को विदा नहीं किया जाता, लेकिन वह नहीं माना और पत्नी को विदा करवाकर अपने घर की ओर चल पड़ा।

अभी वे पति-पत्नी नगर के बाहर पहुँचे ही थे कि पत्नी को प्यास लगी। पति लोटा लेकर पानी की खोज में चला गया। पत्नी एक पेड़ के नीचे बैठकर पति के आने की प्रतीक्षा करने लगी। जब पति पानी लेकर लौटा तो उसे यह देखकर घोर आश्चर्य हुआ कि उसकी पत्नी के पास उसी का हमशक्ल युवक बैठा था और दोनों हँस-हँसकर बातें कर रहे थे।

यह देख पति क्रोधित हो गया। फिर वह अपने हमशक्ल युवक से झगड़ने लगा। दोनों गुत्थमगुत्था हो गए। तब तक वहाँ काफी भीड़ इकट्ठी हो गई। यह देखकर पत्नी को भी बड़ा आश्चर्य हुआ। इसी बीच सिपाही भी वहाँ आ गए। उन्होंने उस स्त्री से पूछा कि बताओ इन हमशक्लों में से तुम्हारा पति कौन है?

यह सुनकर वह स्त्री असमंजस में पड़ गई। अपनी पत्नी की ऐसी अवस्था देखकर युवक ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि हे प्रभो! आप हमारी रक्षा करें। मुझसे बड़ी भूल हो गई कि मैं बुधवार को अपनी पत्नी को उसके पीहर से विदा करा लाया। अब भविष्य में कभी भी ऐसा नहीं करूँगा।

युवक द्वारा ऐसी प्रार्थना करते ही दूसरा हमशक्ल युवक अन्तर्धान हो गया और वे पति-पत्नी सकुशल घर पहुँच गए। तब से दोनों पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत करने लगे।

आरती

पूजन के अंत में श्री शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा का गायन करें।

व्रत की सम्पूर्ण विधि, माहात्म्य एवं उद्यापन विधि के लिए देखें — प्रदोष व्रत कथा एवं पूजन विधि।

स्रोत 1

  • प्रदोष व्रत कथा — पवन पॉकेट बुक्स, दिल्ली (मुद्रित पुस्तिका) — प्रदोष व्रत कथा (पूजन विधि, सातों वारों की प्रदोष कथाएँ, माहात्म्य, उद्यापन विधि व आरती सहित), पवन पॉकेट बुक्स, 4537 नई सड़क, दिल्ली-110006; पृष्ठ 2–23

    पाठ मुद्रित पुस्तिका के पृष्ठ-चित्रों से मिलाकर उतारा गया है — दिया गया लिंक प्रकाशक का सूची-पृष्ठ है, पाठ का स्रोत नहीं। अक्टूबर 2026 की संपादकीय समीक्षा में फल-सम्बन्धी कथन मान्यता के रूप में रखा गया; तिथि और कथा-स्रोत की पंक्तियाँ वेद पथ द्वारा लिखी गई हैं।

यह सामग्री वेद पथ संपादकीय टीम द्वारा संकलित एवं संपादित है, और इसकी क्रमशः समीक्षा की जा रही है।

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